Krishna Janmashtami 2018, बन रहा है यह अद्भुत संयोग, क्या करें

Krishna Janmashtami 2018,

नमस्कार दोस्तों मै Gyan Ranjan इस blog post में बताऊंगा की आखिर क्यों Janmashtami 2018, का है विशेष महत्व।वह कौन सा अद्भुत संयोग बन रहा है जिसका प्रभाव हमारे जीवन पर सकता है और किन-किन बातों का ध्यान रखने पर इस Krishna Janmashtami 2018 का प्रभाव हमारे लिए अच्छा होगा। तो आइये शुरू करते हैं।

दोस्तों पहले हम जान लें की इसबार Krishna Janmashtami किस तिथि को मनाया जा रहा है। तो आपकी जानकारी के लिए हम बता दे की इसबार यह 2 अलग-अलग तिथियों में मनाया जा रहा है। शैव परम्परा के हिसाब से यह पर्व 2 सितम्बर मनाया जाना है जबकि विष्णु परम्परा के अनुसार इसे 3 सितंबर को मनाया जायेगा। शैव परम्परा में तिथि का निर्धारण रात्रि 12 बजे के आधार पर होता है जबकि विष्णु परम्परा के अनुसार यदि अष्टमी का एक भी पल सूर्योदय में आ गया तो उसी दिन Krishna Janmashtami मनाया जाता है। यही कारण है की इस बार यह पर्व दो अलग-अलग तिथियों में मनाया जा रहा है।
अब बात कर ले उस विशेष संयोग की जो इसबार पर रहा है। इस बार Krishna Janmashtami पर ठीक वैसा ही संयोग बन रहा है, जैसा द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय बना था। इस अद्भुत संयोग को कृष्ण जयंती योग भी कहा जाता है जो की वर्षों बाद बनता है। ऐसे अवसर पर पूजा अर्चना करने से अत्यधिक लाभ मिलता है। इस योग में यदि निश्छल मन से पूजा की जाय तो कई जन्मों के पाप धूल जाते हैं और उसे ईश्वर की असीम अनुकम्पा प्राप्त होती है।
यदि व्रत नहीं भी करते हैं तो भी कुछ बातों का ध्यान रखकर श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
क्या करें
इस शुभ अवसर पर सर्वप्रथम स्नान कर पवित्र हो लें।
पवित्र वस्त्र धारण कर लें
सपरिवार मंदिर जाके निश्छल मन से इस्वर की आराधना करें।
अच्छे-अच्छे मिस्ठान तथा फल का भोग लगाएं।
भोग में तुलसी पत्र अवश्य डाले क्योकिं तुलसी भगवन श्री कृष्ण को बहुत पसंद है।
घर में शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाकर रखें।
इस अवसर पर अपने से बड़ों का आशीष प्राप्त करने का प्रयास करें।

क्या ना करें
चुकी इसबार Krishna Janmashtami पर त्रिपुष्कर योग बन रहा है इसलिए जहां अच्छे कर्मों का तिगुना लाभ मिलेगा वहीँ बुरे कर्म का तिगुना पाप भी लगेगा। इसलिए आज के दिन कोई भी गलत कम न करें। किसी भी वाद-विवाद में न फसें। इस दौरान किसी की भी निंदा न करें। मन को तो पवित्र रखें ही साथ ही तन को भी अपवित्र न होने दें।
दोस्तों इन सभी बातों का ध्यान रखकर आप इस अनुपम और अद्भुत संयोग का लाभ उठा सकते हैं।
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